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क्षात्रधर्म का कार्य है रक्षा करना। अपने आपकी रक्षा करना, अपने परिवार की रक्षा करना, अपने गाँव-शहर की रक्षा करना, अपने राष्ट्र की रक्षा करना। क्योंकि क्षात्र-धर्म देश, काल से निरपेक्ष धर्म है, अतः केवल राष्ट्र तक ही सीमित नहीं है। सम्पूर्ण विश्व में जो अराजकता है उससे निजात दिलाना भी कर्त्तव्य और धर्म हमारा ही है। अतः जो कुछ हम कर रहे हैं, वह केवल अपनी जाति के लिए ही नहीं कर रहे हैं, केवल हमारे राष्ट्र के लिए ही नहीं कर रहे हैं, सम्पूर्ण मानवता और प्राणीमात्र के लिए कर रहे हैं। यह बात हमें भली प्रकार अपने जीवन में उतार लेनी है। अन्य लोगों के यह बात समझ में बिल्कुल ही नहीं आई है, इसलिए इसे जातिगत संगठन कहा जाता है।

माननीय संघप्रमुखश्री (उच्च प्रशिक्षण शिविर, बेट द्वारिका(गुजरात) में 24 मई,2015 को प्रदत्त प्रभात संदेश से)

संघ-समाचार

बीकानेर में युवा मार्गदर्शन एवं संवाद कार्यशाला सम्पन्न
February 13, 2018
विभिन्न स्थानों पर मनी पूज्य श्री की जयन्ती
January 26, 2018
जीवाणा, पुणे, उदयपुर एवं बालोतरा में जयन्ती कार्यक्रम सम्पन्न
January 24, 2018
मोरुआ, खिंदारा गांव एवं मेवानगर में कार्यक्रम सम्पन्न
January 23, 2018
पूज्य श्री तनसिंह जयन्ती सप्ताह का शुभारम्भ
January 21, 2018
जब्दी (उत्तरप्रदेश) में प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर एवं गुड़ामालानी में स्नेहमिलन सम्पन्न
January 16, 2018
शिहोरी (कांकरेज) एवं बापिणी में स्नेहमिलन सम्पन्न
January 15, 2018

आज का दर्शन

राष्ट्रीय शरीर को गुलामी की बेड़ियाँ पराधीन बना सकती हैं, किन्तु हमेशा के लिए समाप्त नहीं कर सकतीं। राष्ट्र की आत्मा जब तक गुलाम नहीं बनाई जाती, तब तक पराजित राष्ट्र भी जीवित रहेगा और जिस दिन उस राष्ट्र के खून में उबाल आया, उस दिन वह विजयश्री का मंगलमय साक्षात्कार भी कर ही लेगा। -पूज्य श्री तन सिंह जी