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क्षात्रधर्म का कार्य है रक्षा करना। अपने आपकी रक्षा करना, अपने परिवार की रक्षा करना, अपने गाँव-शहर की रक्षा करना, अपने राष्ट्र की रक्षा करना। क्योंकि क्षात्र-धर्म देश, काल से निरपेक्ष धर्म है, अतः केवल राष्ट्र तक ही सीमित नहीं है। सम्पूर्ण विश्व में जो अराजकता है उससे निजात दिलाना भी कर्त्तव्य और धर्म हमारा ही है। अतः जो कुछ हम कर रहे हैं, वह केवल अपनी जाति के लिए ही नहीं कर रहे हैं, केवल हमारे राष्ट्र के लिए ही नहीं कर रहे हैं, सम्पूर्ण मानवता और प्राणीमात्र के लिए कर रहे हैं। यह बात हमें भली प्रकार अपने जीवन में उतार लेनी है। अन्य लोगों के यह बात समझ में बिल्कुल ही नहीं आई है, इसलिए इसे जातिगत संगठन कहा जाता है।

माननीय संघप्रमुखश्री (उच्च प्रशिक्षण शिविर, बेट द्वारिका(गुजरात) में 24 मई,2015 को प्रदत्त प्रभात संदेश से)

संघ-समाचार

बीकानेर में स्थापना दिवस समारोह की तैयारियों हेतु बैठक
December 13, 2017
देश भर में मनाई पूज्यश्री की पुण्यतिथि
December 8, 2017
श्री क्षत्रिय युवक संघ स्थापना दिवस समारोह के पोस्टर का विमोचन
December 2, 2017
तनाश्रम(जैसलमेर) में सर्वसमाज स्नेहमिलन व ‘यथार्थ गीता’ वितरण
November 29, 2017
जालोर एवं बीकानेर में स्नेहमिलन व कर्मचारी प्रकोष्ठ की बैठक संपन्न
November 28, 2017
शाखा में होता है संस्कारों का सृजन- संघप्रमुखश्री
November 27, 2017
फरीदाबाद में पारिवारिक स्नेहमिलन सम्पन्न
November 27, 2017

आज का दर्शन

राष्ट्रीय शरीर को गुलामी की बेड़ियाँ पराधीन बना सकती हैं, किन्तु हमेशा के लिए समाप्त नहीं कर सकतीं। राष्ट्र की आत्मा जब तक गुलाम नहीं बनाई जाती, तब तक पराजित राष्ट्र भी जीवित रहेगा और जिस दिन उस राष्ट्र के खून में उबाल आया, उस दिन वह विजयश्री का मंगलमय साक्षात्कार भी कर ही लेगा। -पूज्य श्री तन सिंह जी