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“जो निरंतर सक्रियता बनाये रखते हैं, उनका अनन्य भाव उन्हें आसानी से समझा देता है कि क्या ग्राह्य है और क्या नहीं। जो आज ग्राह्य नहीं है, वह अनुकूल भूमिका या परिस्थिति बनने पर कल ग्राह्य हो सकता है। अब तक जिसकी क्षमता किसी बात को ग्रहण करने की नहीं है, वह कल विकसित हो सकती है। सर्चलाईट के, प्रकाश के जो अभिमुख है, वह प्रकाशित हो जायेगा। जो विमुख है, वह प्रकाश कैसे ग्रहण कर सकता है? हम संघ के जितने अभिमुख होंगे, उतना ही ग्रहण करेंगे।”
माननीय संघप्रमुख श्री, 01.09.2007 को संघशक्ति में आयोजित विशेष शिविर के स्वागत उद्बोधन् से।

संघ-समाचार

नौसर, दूधवा, गुड़ा श्यामा एवं राजमथाई में माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न
October 16, 2017
10 प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न
October 13, 2017
शिविरों की श्रृंखला में जुड़े 14 और शिविर
October 4, 2017
तीन राज्यों में शिविर संपन्न
September 27, 2017
‘सोशल मीडिया और संघ’ विषय पर बैठक का आयोजन
September 25, 2017
चांधन में मनाई श्रद्धेय आयुवानसिंह जी की जयन्ती
September 25, 2017
प्रशासनिक अधिकारियों का स्नेहमिलन आयोजित
September 24, 2017

आज का दर्शन

जिस उद्देश्य के लिए नियमों की रचना हुई है, उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही नियम काम करें। अन्यथा उद्देश्य एक तरफ रहकर नियम ही उद्देश्य बन जाते हैं। ऐसी परिस्थिति जिस किसी देश, समाज या राष्ट्र में होगी, वहां प्रतीक पूजा और साथ ही यांत्रिकता इतनी बढ़ जायेगी कि लोग उद्देश्य को भूलकर पाखण्ड और प्रपंच में ही अपने प्रदर्शन की चेष्टा करते रहेंगे। - पूज्य श्री तनसिंह जी