दंपति शिविर

सामान्य परिचय

शिविर – श्री क्षत्रिय युवक संघ की साधना उध्र्वगामी साधना है। वर्तमान युग में हमारा समाज भी भौतिक परिस्थितियों व संसार की झूठी चकाचैंध को प्राप्त करने के लिए अधोगति तक को स्वीकार करने के लिए तत्पर है। ऐसी मनोवृति को छोड़ कर क्षत्रिय के उच्च आदर्शों की ओर अग्रसर करना समाज के भीतर दैनिक जीवन के विषमय वातावरण में असम्भव सा लगता है। अतः हमारे दैनिक जीवन से अलग ले जाकर एक कृत्रिम वातावरण का सृजन कर उसमें संघ के सिद्धान्तों का अभ्यास करवाने के लिए शिविरों का अयोजन किया जाता है। ऐसे शिविरों के स्थान यथासंभव कोलाहल से दूर एकांत एवं नीरव स्थान होते हैं। जहा शिविरार्थियों को 24 घण्टे अमृतमय वातावरण में अनुकूल को अपनाने एवं प्रतिकूल को छोड़ने का अभ्यास कराया जाता है। शिविरों का आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग से किया जाता है। स्थानीय लोग सामान्य भोजन की व्यवस्था कर देते है एवं शेष दैनिक उपयोग की न्यूनतम आवश्यकता वाली वस्तुएं शिविरार्थी अपने साथ लेकर आते हैं।

-श्री क्षत्रिय युवक संघ

दंपति शिविर

हमारी सनातन व्यवस्था में परिवार जीवन का महत्वूपर्ण आधार है। परिवार पत्नी एवं पत्नी मिलकर बनाते हैं। पत्नी एवं पत्नी का दायित्व विभिन्न आयुवर्ग में अलग अलग होता है। एक नव विवाहित दंपति का वैवाहिक जीवन अलग विशेषताओं एवं आवश्यकताओं के लिए होता है तो प्रोढ़ दंपति की विशेषता एवं आवश्यकता भिन्न होती है। इन सब का ध्यान रखते हुए माननीय संघ प्रमुख जी के सानिध्य मे विभिन्न आयुवर्ग के अलग अलग समूहों में दंपति शिविर विभिन्न तीर्थ स्थलों पर प्रतिवर्ष आयोजित किए जाते हैं। ये शिविर प्रायः फरवरी माह मे शिक्षण का पारिवारिक उत्तरदायित्वों से निवृत हो आध्यात्मिक जीवन की अग्रसर होने से संबधित चर्चाएँ होती है। शिविरों का वातावरण इतना आनंददायी होता है जैसे हमारे परिवारों के संकुचित घेरे टूट रहे होते हैं और हम सब एक परिवार का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

-श्री क्षत्रिय युवक संघ