बालिका शिविर

सामान्य परिचय

शिविर – श्री क्षत्रिय युवक संघ की साधना उध्र्वगामी साधना है। वर्तमान युग में हमारा समाज भी भौतिक परिस्थितियों व संसार की झूठी चकाचैंध को प्राप्त करने के लिए अधोगति तक को स्वीकार करने के लिए तत्पर है। ऐसी मनोवृति को छोड़ कर क्षत्रिय के उच्च आदर्शों की ओर अग्रसर करना समाज के भीतर दैनिक जीवन के विषमय वातावरण में असम्भव सा लगता है। अतः हमारे दैनिक जीवन से अलग ले जाकर एक कृत्रिम वातावरण का सृजन कर उसमें संघ के सिद्धान्तों का अभ्यास करवाने के लिए शिविरों का अयोजन किया जाता है। ऐसे शिविरों के स्थान यथासंभव कोलाहल से दूर एकांत एवं नीरव स्थान होते हैं। जहा शिविरार्थियों को 24 घण्टे अमृतमय वातावरण में अनुकूल को अपनाने एवं प्रतिकूल को छोड़ने का अभ्यास कराया जाता है। शिविरों का आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग से किया जाता है। स्थानीय लोग सामान्य भोजन की व्यवस्था कर देते है एवं शेष दैनिक उपयोग की न्यूनतम आवश्यकता वाली वस्तुएं शिविरार्थी अपने साथ लेकर आते हैं।

-श्री क्षत्रिय युवक संघ

बालिका शिविर

हमारा इतिहास आदर्श माताओं के विवरण से भरा पड़ा है। आदर्श माताएँ ही श्रेष्ठ संतान का निर्माण कर सकती है। आज की बालिकाएँ कल की माताएं हैं लेकिन वर्तमान वातावरण में उन्हें नारी धर्म, संस्कार, स्त्री के भूषण व दूषण, पारीवारिक एवं सामाजिक परम्पराओं, इतिहास तथा जातीय गौरव और आदर्शों की शिक्षा मिलना दुर्लभ है, इन सब विषयों पर विस्तृत शिक्षण हेतु बालिकाओं के भी प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों मे शिक्षण का कर्म संघ के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग स्वयंसेवक करते हैं, शनैः शनैः बालिकाएँ एवं महिलाएं भी इस कर्म के लिए तैयार हो रही हैं। प्रतिवर्ष लगभग 50 बालिका शिविर संघ के कर्मक्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर लगते हैं। इन शिविरों के परिणाम स्वरूप पारीवारिक जीवन में परस्पर सौहार्द, सहिष्णुता, शुद्धता का वातावरण बनने में सहायता मिलती है|