शिविरों की दिनचर्या

सामान्य परिचय

शिविर – श्री क्षत्रिय युवक संघ की साधना उध्र्वगामी साधना है। वर्तमान युग में हमारा समाज भी भौतिक परिस्थितियों व संसार की झूठी चकाचैंध को प्राप्त करने के लिए अधोगति तक को स्वीकार करने के लिए तत्पर है। ऐसी मनोवृति को छोड़ कर क्षत्रिय के उच्च आदर्शों की ओर अग्रसर करना समाज के भीतर दैनिक जीवन के विषमय वातावरण में असम्भव सा लगता है। अतः हमारे दैनिक जीवन से अलग ले जाकर एक कृत्रिम वातावरण का सृजन कर उसमें संघ के सिद्धान्तों का अभ्यास करवाने के लिए शिविरों का अयोजन किया जाता है। ऐसे शिविरों के स्थान यथासंभव कोलाहल से दूर एकांत एवं नीरव स्थान होते हैं। जहा शिविरार्थियों को 24 घण्टे अमृतमय वातावरण में अनुकूल को अपनाने एवं प्रतिकूल को छोड़ने का अभ्यास कराया जाता है। शिविरों का आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग से किया जाता है। स्थानीय लोग सामान्य भोजन की व्यवस्था कर देते है एवं शेष दैनिक उपयोग की न्यूनतम आवश्यकता वाली वस्तुएं शिविरार्थी अपने साथ लेकर आते हैं।

-श्री क्षत्रिय युवक संघ

शिविरों की दिनचर्या

प्रातः काल 4.00 बजे शंख की ध्वनि और जागरण गीत के साथ दिनचर्या प्रारम्भ होती है। जागरण, निवृत्ति के पश्चात ध्वज वंदना होती है। वंदना के पश्चात व्यायाम एवं खेल, तत्पश्चात अल्पाहार। अल्पाहार के पश्चात सामास्या के तहत चर्चा फिर स्नान एवं यज्ञ तथा यज्ञ के पश्चात अर्थ बोध के तहत संघ साहित्य पर चर्चा होती है। इसके बाद भोजन, विश्राम एवं बौद्धिक खेल होते है। इसके बाद संघ दर्शन पर विस्तृत विवेचना सहित प्रवचन एवं तत्पश्चात सायंकालीन क्रीड़ा होती है। क्रीड़ा के पश्चात आद्यशक्ति की प्रार्थना, घट चर्चा (समूह चर्चा) एवं भोजन होता है। इस प्रकार पूरा दिन शरीर,मन, बुद्धि एवं हृदय के विकास के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों को संजोए हुए शिविरार्थी को व्यस्त रखा जाता है ताकि वह पूरे दिन स्वयं संघ व समाज का चिंतन कर सके|