‘मिट जाए मेरा नाम भले, रह जाये यजमानों का’ – यह संघ का उद्घोष है। हमें स्वयं की चिंता नहीं करनी है, अपने यजमानों की करनी है। हमारे यजमान अर्थात यह समाज, राष्ट्र और यह सम्पूर्ण सृष्टि जहाँ हमें ईश्वर ने मेहमान बनाकर भेजा है। स्वयं को मिटाकर भी इनकी सेवा करना हमारा कर्त्तव्य है। यही हमारे पूर्वजों ने किया और यही करने के लिए हमें तैयार करने का कार्य संघ कर रहा है। महाभारत में प्रसंग आता है कि यक्ष के प्रश्न के उत्तर में युधिष्ठिर कहते हैं कि ‘जिस मार्ग से हमारे पूर्वज गुजरे, वही मार्ग है।’ हमारे लिए भी वही मार्ग है जो हमारे पूर्वजों ने हमें बताया है और वह मार्ग है स्वयं को मिटाकर भी अन्यों की रक्षा करना। जो स्वयं की चिंता नहीं करता, उसकी चिंता भगवान करते हैं, और जिसके साथ भगवान है उन्हें कोई आग नहीं जला सकती। चाहे लाक्षागृह में पांडव हो या होलिका की गोद में प्रह्लाद, भगवान अपने भक्तों की रक्षा में सदैव तैयार रहते हैं।
यह संदेश माननीय संघप्रमुख श्री ने जोधपुर शहर में स्थित संघ कार्यालय तनायन में 24 मार्च को आयोजित होली स्नेहमिलन में उपस्थित स्वयंसेवकों व उनके परिवारजनों से कही। संघप्रमुख श्री के जोधपुर प्रवास के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में शहर में रहने वाले स्वयंसेवक परिवार सहित सम्मिलित हुए तथा स्नेहमिलन के पश्चात स्नेहभोज का भी कार्यक्रम रखा गया।

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