ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अपनी हार के कारण बाहर ढूंढें जाते हैं किन्तु संत परम्परा अपनी पराजय का कारण स्वयं में ही ढूंढ निकलती है। श्री क्षत्रिय युवक संघ भी इसी परंपरा का वाहक है और हमारी पराजयों का कारण हमारी एकता के अभाव को मानता है। उसी एकता के अभाव को दूर करने के लिए समाज में संगठन और संस्कार निर्माण का कार्य संघ कर रहा है। संगठित होने की दृष्टि से हमारा शक्तिशाली होना भी आवश्यक है और समाज का राजनैतिक सशक्तिकरण भी उसी की एक कड़ी है। वर्तमान चुनावों में भी हमें सामाजिक दृष्टिकोण से मतदान करके समाज को शक्तिशाली बनाने में सहयोग करना है। पार्टी अथवा व्यक्ति को न देखकर हमें समाज को देखना है। पार्टियाँ हमारी माँ नहीं है, वे जब चाहे बदली जा सकती है किंतु इस समाज को हम नहीं बदल सकते, जिसमें हमने जन्म लिया है, उस धरती को नहीं बदल सकते हैं जो हमारी जन्मभूमि है, माँ की कोख को नहीं बदल सकते जिससे हमारा जन्म हुआ है। अतः मातृस्वरूपा समाज के अनुकूल रहकर संगठित होकर मतदान करें, जिससे हमारा समाज सुदृढ़ होकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सके।
उपरोक्त संदेश माननीय संघप्रमुख श्री ने अपने चित्तौड़ प्रवास के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में दिया। 19 अप्रैल को संघप्रमुख श्री के प्रवास के दौरान निम्बाहेड़ा स्थित राजपूत छात्रावास तथा चित्तौड़गढ़ स्थित भूपाल राजपूत छात्रावास में स्नेहमिलन कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें स्थानीय समाजबंधु सम्मिलित हुए।

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