रावण द्वारा सीता जी के अपहरण के पश्चात भगवान श्री राम जब उनके वियोग में लक्ष्मण के साथ वन में भटक रहे थे तब सुग्रीव ने उन्हें देखकर हनुमान को उनका परिचय जानने के लिए भेजा। हनुमान एक ब्राह्मण का वेश धारण करके उनके पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया। श्रीराम ने उन्हें कहा- आओ हनुमान!
राम के मुख से अपना नाम सुनकर जैसे युग युग की पहचान जाग उठी और उसी क्षण से हनुमान श्रीराम के हो गए। ठीक ऐसे ही नारायण सिंह जी ने पूज्य श्री तनसिंह जी को पहचान लिया और सदा के लिए उनके हो गए। हनुमान जी की भांति ही नारायणसिंह जी आदर्श अनुयायी थे और किसी भी महान कार्य को संपादित होने के लिए ऐसे ही अनुयायियों की आवश्यकता होती है। श्री क्षत्रिय युवक संघ भी संसार में क्षात्र-प्रवृत्ति की पुनर्स्थापना के महान कार्य में संलग्न है और इसकी सफलता के लिए नारायणसिंह जी की कर्मठता और निष्ठा की आवश्यकता है।
उपरोक्त बातें माननीय संघप्रमुख श्री ने संघ के तृतीय संघप्रमुख पूज्य नारायणसिंह जी रेडा की 78वीं जयन्ती पर जयपुर में संघशक्ति भवन में 30 जुलाई, 2018 को आयोजित कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में जयपुर शहर में रहने वाले राजपूत परिवार सम्मिलित हुए तथा नारायणसिंह जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
जयपुर के अतिरिक्त भी देशभर में पूज्य नारायणसिंह जी की जयन्ती के उपलक्ष्य में स्वयंसेवकों तथा समाजबंधुओं द्वारा 29 तथा 30 जुलाई को कार्यक्रम आयोजित किए गए। जोधपुर शहर में जयंती कार्यक्रम 30 जुलाई को चौपासनी स्थित पंचवटी आश्रम छात्रावास में शहर के वयोवृद्ध स्वयंसेवकों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। पारिवारिक स्नेह भोज का आयोजन श्री लूणकरण सिंह तेना के द्वारा रखा गया। वरिष्ठ स्वयंसेवक श्री चैन सिंह जी बैठवास और पूर्व सांसद श्री नारायण सिंह जी माणकलाव ने पूज्य श्री नारायणसिंह जी के अद्भुत जीवन का परिचय देते हुए उनके साथ बिताए समय के संस्मरण साझा किए।
इसी प्रकार जालोर जिले के जाविया गांव स्थित खोडेश्वर महादेव मंदिर में 29 जुलाई को जयन्ती कार्यक्रम संघ के केन्द्रीय कार्यकारी श्री रेवन्त सिंह पाटोदा एवं जालोर संभाग प्रमुख श्री अर्जुन सिंह देलदरी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के समाजबंधुओं ने एकित्रत होकर नारायणसिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नागौर जिले में कुचामन सिटी स्थित संघ कार्यालय आयुवान निकेतन में वरिष्ठ स्वयंसेवक भगवत सिंह जी सिंघाणा तथा संभाग प्रमुख श्री शिंभू सिंह आसरवा की उपस्थिति में 30 जुलाई को जयन्ती कार्यक्रम का आयोजन हुआ। नागौर जिले में ही 29 जुलाई को कुचामन फोर्ट में जयन्ती मनाई गई, जिसमें प्रान्त प्रमुख श्री नत्थू सिंह छापड़ा उपस्थित रहे। नागौर शहर स्थित शहीद उम्मेदसिंह झटेरा के स्मारक पर भी जयन्ती कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसी प्रकार पाली जिले के सोजत रोड कस्बे में जयन्ती कार्यक्रम केन्द्रीय कार्यकारी श्री प्रेम सिंह रणधा के सान्निध्य में 30 जुलाई को सम्पन्न हुआ। पाली जिले में ही जोजावर में भी जयंती मनाई गई। उदयपुर में ओस्तवाल नगर में स्वयंसेवकों के मासिक स्नेहमिलन के साथ ही जयन्ती कार्यक्रम का आयोजन 29 जुलाई को हुआ जिसमें संभागप्रमुख श्री भँवर सिंह बेमला उपस्थित रहे। चित्तौड़गढ़ में सभी शाखाओं द्वारा सामूहिक रूप से जयन्ती मनाई गई, जिसमें संभाग प्रमुख श्री गंगा सिंह साजियाली उपस्थित रहे।
मुम्बई प्रान्त की सभी शाखाओं द्वारा सामूहिक रूप से नारायणसिंह जी की जयंती भायंदर में एकत्रित होकर मनाई गई।
गुजरात में भावनगर स्थित मनहर कुंवर बा छात्रावास में जयन्ती कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें संघ के केंद्रीय कार्यकारी श्री महेंद्र सिंह जी तथा गोहिलवाड राजपूत समाज के अध्यक्ष श्री वासुदेव सिंह उपस्थित रहे। सुरेंद्रनगर स्थित संघ कार्यालय शक्तिधाम में भी नारायणसिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कानेटी में आयोजित जयन्ती कार्यक्रम में संभाग प्रमुख श्री दीवानसिंह कानेटी उपस्थित रहे। भाल प्रान्त में धोलेरा तथा पांची गांव में जयन्ती मनाई गई। अहमदाबाद शहर प्रान्त का जयन्ती कार्यक्रम मेघाणीनगर में सम्पन्न हुआ जिसमें श्री जगतसिंह वलासणा उपस्थित रहे। मेहसाणा में शाखा स्तर पर जयन्ती मनाई गई। इसी प्रकार सूरत में हलधरु स्थित मातेश्वरी सोसाइटी में जयन्ती कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें शहर के स्वयंसेवक तथा अन्य समाजबंधु सम्मिलित हुए। गुजरात के बनासकांठा प्रान्त में पीलूड़ा, वलादर, नारोली, करबूण, थराद, दियोदर, जाड़ी आदि गांवों में भी जयन्ती मनाई गई।
जैसलमेर संभाग में विभिन्न प्रान्तों में प्रान्त स्तर पर जयन्ती कार्यक्रम आयोजित हुए। रामगढ़-मोहनगढ़ प्रान्त में रामगढ़ स्थित राजपूत छात्रावास में जयन्ती मनाई गई, जिसमें संभाग प्रमुख श्री गोपाल सिंह रणधा व प्रान्त प्रमुख श्री पदम सिंह रामगढ़ उपस्थित रहे। जैसलमेर शहर प्रान्त का जयन्ती कार्यक्रम शहर में स्थित संघ कार्यालय तनाश्रम में सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रान्त प्रमुख सहित शहर के स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। चांधन प्रान्त में मुलाना तथा देवीकोट में कार्यक्रम आयोजित हुए। म्याजलार-झिंझनियाली प्रान्त में बेरसियाला, तेजमालता व झिंझनियाली में जयन्ती मनाई गई। इनके अतिरिक्त छोटी रानी, भिंयाड़, बीदासर, बालोतरा, कल्याणपुर, भैंसड़ा आदि स्थानों पर जयन्ती कार्यक्रम आयोजित हुए।

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